पैलो मेनु खोल्या

भीमसेन थापा (सन् १७७५ अगस्ट – सन् १८३९ अगस्ट ५) नेपाल का दोसरा तथा सबै है लमा समय सम्म पद मी रयाऽ नेपाल का मुख्तियार (प्रधानमन्त्री सरह) तथा राष्ट्रिय विभूति हुन्। राजा रणबहादुर शाह का हजुरिया (शाही सचिव तथा सल्लाहकार) भया पछा भीमसेन थापा को उदय भयाऽ हो। सन् १८०० मी रणबहादुर गद्दीत्याग अरीबर निर्वासित जीवन बितौनाइ भारत का वाराणसी जन्ज्याँ भीमसेन थापा लै सङ्ङै जाइरैथ्या[२][३][४]। इसै कृतज्ञता का कारण, रणबहादुर शाह ले भीमसेन थापा लाई नोला विस्तारित सरकार मी काजी (मन्त्री सरह को पद) का पद मी नियुक्त अर्‍यो । सन् १८०६ मी रणबहादुर शाह को हत्या उनराइ सौतेला भाइ शेरबहादुर शाह हताँ भया पश्चात भीमसेन थापा ले ९३ जना को हत्या अरीबर स्वयं आफुइ मुख्तियार (प्रधानमन्त्री सरह को पद) बन्या।

श्री मुख्तियार जर्नेल
भीमसेन थापा
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भीमसेन थापा, नेपालाः मुख्तियार (प्रधानमन्त्री सरह) १८०६ बठेइ १८३७ सम्म

कार्यकाल
१८०६ – १८३७
शासक : गीर्वाणयुद्ध विक्रम शाह
राजेन्द्र विक्रम शाह
अग्रज : रणबहादुर शाह
मुख्तियाराः रूप माइ
उतराधिकारी : रणजङ्ग पाण्डे
आफ्नोइ जानकारी
जनम (१७७५-०८-००)अगस्ट १७७५
बोर्लाङोः पीपल थोक गाउँ, गोरखा जिल्ला, नेपाल
मर्‍या ५ अगस्ट १८३९(१८३९-०८-०५) (६४ वर्ष)
भीम मुक्तेश्वर, काठमाडौं, नेपाल
राष्ट्रियता नेपाली
सम्बन्ध भतिजी महारानी ललित त्रिपुरा सुन्दरी, भतिजा प्र.म. माथवरसिंह थापा, नाति जङ्गबहादुर राणा
चेलाचेली ललिता देवी पाण्डे, जनक कुमारी पाण्डे, रे दीर्घ कुमारी पाण्डे[१]
पुरस्कार राष्ट्रिय विभूति
सैनिक सेवा
निष्ठा  नेपाल
सेवा/शाखा नेपाली सेना
क्रम नेपालकाः प्रधान सेनापतिइन
नियन्त्रण नेपालका सेनापति
युद्ध नेपाल अङ्ग्रेज युद्ध

विषयसूची

बचपनसम्पादन

भीमसेन थापा को जनम वि.सं. १८३२ नौ गते का दिन गोरखा का बोर्लाङ का पीपल थोक गाउँ मी क्षेत्री परिवार मी भयाऽथ्यो। अमरसिंह थापा (सानुकाजी) रे सत्यरूपा माया का जेठा चेला थ्या। उन बगाले थापा हुन भँण्णेइ भुणाइ छ। उनरा भाइन सहोदर मी नैनसिंह थापा, अमृतसिंह थापा, भक्तवर सिंह थापा, रणवीर सिंह थापा तथा सौतेला मी रणजावर सिंह थापा रे रणबम सिंह थापा थ्या[५]। ब्रतबन्ध का क्रम मी सर्वप्रथम भीमसेन थापा को भेट रणबहादुर शाह सित भयाऽथ्यो। तै बगत उनरी उमर १० बर्ष को थ्यो। यकै उमेर मी शाह रे थापा की मित्तुराइ का जग मी तसै बगत तयार भयाऽथ्यो। उनरो बचपन गोर्खा मी भउतै सुखमय रूपमी बित्याऽथ्यो। उनरी पढ़ाइ को व्यवस्था तसै बगत का परिस्थिति अनुरुप मिलाइयाऽथ्यो।

राजनीतिक जीवनसम्पादन

भीमसेन थापा का प्रधानमन्त्रीकाल मी नेपाल साम्राज्य को भउतै विस्तार भयाऽ थ्यो । येइ को प्रमाण येइ बठेइ लाउन सकिन्छ कि तै समय मी येइ साम्राज्य को सिमाना पश्चिम मी सतलज नदी रे पूर्व मी टिस्टा नदी सम्म पुग्याऽ थ्यो। तर, सन् १८१४-१८१६ सम्म नेपाल विनासकारी अङरेज-नेपाल लणै मी फस्यो, जै का फलस्वरूप नेपाल ले सुगौली सन्धि अरीबर आफुनो यक तिहाइ जमीन इस्ट इन्डिया कम्पनी लाई सौँप्दु पण्यो। येइ लणै मी हार का कारण नेपाल मी ब्रिटिस रेसिडेन्सी को स्थायित्व कायम भयाऽ थ्यो।

सन् १८१६ मी युवावस्थाइ मी राजा गीर्वाणयुद्ध विक्रम शाह को मृत्यु तथा उनरा उत्तराधिकारी राजा राजेन्द्र विक्रम शाह ननाइ भयाऽ कारण तथा रानी ललितत्रिपुरसुन्दरी (रणबहादुर शाह की कान्सी स्वाआनी) तथा केइ दरबारिया का समर्थना कारण नेपाल-अङरेज लणै मी हार्‍या लै भीमसेन थापा शक्ती मी रैेरैथ्या।

सन् १८३२ मी उनरी ठुली समर्थक रानी ललितत्रिपुरसुन्दरी को मृत्य तथा राजा राजेन्द्र विक्रम शाह युवावस्था मी पुग्या पछा भीमसेन थापा को शक्ति स्थिर भयाऽ थ्यो। खास अरीबर पाण्डेइन भीमसेन थापा लाई दामोदर पाण्डे को सन् १८०४ मी भयाऽ हत्या को योजनाकार माणन्थ्या। अनेक षड्यन्त्र रे विरोधी दरबारियाअन का गतिविधि का कारण छाड्डीचाआल भीमसेन थापा सन् १८३९ मी जेल हालीया रे उन ले वाइँ आत्महत्या अर्‍यो। तर, उनरी मृत्यु पछा लै भितल्ली कल शान्त नाइभै रे तैे का फलस्वरूप राणा शासनकाल को उदय भयो।


वंश वृक्षसम्पादन

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
वीरभद्र थापा
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
सत्यरुपा माया
 
अमरसिंह थापा
 
 
 
 
 
 
 
 
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भीमसेन थापा
 
नैनसिंह थापा
 
बख्तावर सिंह थापा
 
अमृतसिंह थापा
 
रणवीर सिंह थापा
 
रणबम सिंह थापा
 
रणजावर सिंह थापा
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
? (छोरा)
 
ललिता देवी पाण्डे
 
जनक कुमारी पाण्डे
 
दीर्घ कुमारी पाण्डे


यि लै हेरऽसम्पादन

सन्दर्भअनसम्पादन

  1. Paudel, Punya Prasad (2006). Aatreya dekhi Paudel samma. Paudel Society for Cultural Promotion. p. 101.
  2. Paudel, Punya Prasad (2006). Aatreya dekhi Paudel samma. Paudel Society for Cultural Promotion. p. 101.
  3. Waller 2004, p. 174.
  4. Pradhan 2012, p. 14; Nepal 2007, p. 51; Amatya 1978; Acharya 2012, pp. 35–36.
  5. Pradhan 2012, p. 22